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Friday, June 22, 2012

अपनों पर करम गैरों पर सितम

हरियाणा ओपन में 13 फीसदी बच्चे ही हो पाए पास मोडरेशन के लाभ से रखा वंचित मुख्य संवाददाता, भिवानी स्कूल में दाखिला हो तो पढ़नेकी जरूरत नहीं पास हो जाओगे और ओपन परीक्षा दी तो धक्के खाओगे। परीक्षा सुधार के नाम पर प्रत्येक बच्चे को 40 से 55 अंक तक की मेहरबानी लुटाई जा रही है। यदि ऐसे ही मेहरबानी करनी है तो परीक्षा लेने का क्या औचित्य है। लेकिन इसके विपरीत हरियाणा ओपन स्कूल के छात्रों को परीक्षा सुधार के नाम पर दिए जाने वाले अंकों से वंचित रखाजाता है। इस वजह से हरियाणा ओपन स्कूल के दसवीं कक्षा मेंमात्र 13.54 प्रतिशत ही बच्चे पास हो पाए है, जबकि शिक्षा बोर्ड की रेगुलर परीक्षा में 65.38 फीसद पास हुए थे। कमोबेश यही स्थिति बारहवीं कक्षा की रही है। हरियाणा ओपन स्कूल में इस कक्षा में 34.44 फीसद और हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड की परीक्षा में 67.82 फीसद बच्चे पास हुए थे। हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड व हरियाणा ओपन स्कूल कोलेकर स्थिति एकदम उलट हो गई है। कमजोर बच्चों को राहत देने के उद्देश्य से नेशनल ओपन स्कूल की तर्ज पर हरियाणाओपन स्कूल की स्थापना की गई थी, लेकिन वर्तमान स्थिति एकदम उलट हो गई है। यहां बता दें कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड हर बार परीक्षा परिणामों में सुधार करने के लिए परीक्षा विनियम के तहत परिणाम मोडरेट करता है। इसके तहत हर बार परीक्षार्थियों को औसतन 40 से 55 अंक प्रत्येक छात्र को बगैर कुछ किए ही दे दिए जाते है। मजेदार बात यह है कि शिक्षा बोर्ड प्रशासन सीबीएसई का अंधा अनुकरण कर रहा है। मोडरेशन को लेकर भी शिक्षा बोर्ड अधिकारी इसी बात का सहारा लेते है। लेकिन देखने वाली बात यह है कि मोडरेशन के नाम पर यदि प्रत्येक बच्चे को 40 से 55 अंक तक दे दिए जाएंगे तो प्रदेश में शिक्षा का क्या सही मायने में भला हो सकता है। यहां स्पष्ट कर दें कि शिक्षाबोर्ड केवल उन छात्रों की परीक्षा लेता है, जो कि निजी वसरकारी स्कूलों में रेगुलर पढ़ते है। जबकि बोर्ड परीक्षा में फेल होने वाले बच्चे, जो रेगुलर पढ़ाई नहीं कर सकते है, उनकी परीक्षा हरियाणा ओपन स्कूल के माध्यम से आयोजित करवाई जाती है। फर्क केवल इतना है कि रेगुलर बच्चों का परीक्षा परिणाम यदि वास्तविक घोषित कर दिया जाए तो वह 25 से 30 प्रतिशत तक ही होता है। ऐसे में शिक्षा विभाग व शिक्षा बोर्ड प्रशासन दोनों को जवाब देना पड़ेगा। इस कारण परीक्षा परिणाम सुधार के नाम पर 40 से55 अंक तक की मेहरबानी छात्रों पर की जाती है, ताकि खुद अधिकारी जवाब देने से बच सकें। इसके विपरीत हरियाणा ओपन स्कूल की परीक्षा क्योंकि बच्चे सीधे देते है और उनके फेल होने की जवाबदेहीन तो शिक्षा विभाग की है और न ही शिक्षा बोर्ड की। ऐसे में उनके परीक्षा परिणाम को सुधारने की आवश्यकता किसी ने महसूस नहीं की। यही वजह है कि परीक्षा विनियम के रूल का फायदा रेगुलर छात्रों को तो दिया जा रहा है पर हरियाणा ओपन स्कूल के छात्रों को नहीं। बॉक्स इस बारे में सेवानिवृत्त न्यायाधीश प्रहलाद सिंह ने कहा कि इस तरह की व्यवस्था से शिक्षा का तो बेड़ा गर्क हो रहा है। उन्होंने कहा कि वास्तव में तो जरूरत इस बात की है कि बच्चों की पढ़ाई पर जोर दिया जाए और इसके बाद उनकी परीक्षा ढंग से आयोजित करवाई जाए। परीक्षा परिणामोंमें कोई मेहरबानी बरतने की बजाए वास्तविक रिजल्ट घोषित किया जाए, ताकि बच्चों को अपनी असलियत का पता लग सके। बॉक्स हरियाणा ओपन स्कूल की दसवीं कक्षा का अप्रैल 2012 का परीक्षा परिणाम वर्ग कुल छात्र परीक्षा में बैठे पास प्रतिशत सामान्य 28849 21742 13.54 ग्रामीण 22306 16774 14.58 शहरी 6543 4968 10.04 लड़के 20898 15686 14.49 लड़कियां 7951 6056 11.09 हरियाणा ओपन स्कूल की बारहवीं कक्षा का अप्रैल 2012 का परीक्षा परिणाम वर्ग कुल छात्र परीक्षा में बैठे पास प्रतिशत सा. 6636 5696 34.44 ग्रामीण 4991 4229 34.35 शहरी 1645 1467 34.69 लड़के 4503 3858 33.17 लड़कियां 2133 1838 37.10