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Monday, August 27, 2012

HBSE Exam Policy News



अब नहीं होगी सभी छात्रों पर 30 से 45 अंक की मेहरबानी

 भिवानी : अब परीक्षाओं में नकल रोकने के नाम पर 50 लाख से अधिक खर्च करने के बाद भी सभी छात्रों पर 30 से 45 अंकों की मेहरबानी नहीं बरती जाएगी। मोडरेशन के नाम पर अंकों की बंदरबांट का सिलसिला आखिर बंद हो गया है। दैनिक जागरण द्वारा उठाए गए इस मुद्दे पर हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड निदेशक मंडल की बैठक में मोडरेशन के नियमों में बदलाव कर दिया गया है।नए बदलाव के मुताबिक अब मोडरेशन का लाभ केवल फेल होने वाले छात्रों को ही दिया जाएगा। जो छात्र पास होने से लेकर 90 प्रतिशत अंक हासिल कर सकते है, अब उन्हे इसका लाभ नहीं दिया जाएगा।


गौरतलब है कि रिजल्ट सुधारने के नाम पर शिक्षा बोर्ड दसवीं व बारहवीं कक्षा के सभी छात्रों को 30 से 45 अंक देता आ रहा है। यह सिलसिला पिछले तीन साल से चल रहा है।
सन 2009 से शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने परीक्षा परिणाम सुधार के नाम से हरेक परीक्षार्थी को 30 से 45 अंक देना शुरू किया हुआ है। बोर्ड के इस फैसले का फायदा फिसड्डी छात्रों को खूब मिल रहा है तो पढ़ाई करने वाले मेरिट छात्रों को खामियाजा भी उठाना पड़ रहा है। क्योंकि प्रथम व द्वितीय श्रेणी के विद्यार्थी भी उनके बराबर आ बैठते हैं। जबकि दूसरी तरफ शिक्षा बोर्ड प्रशासन हर बार वार्षिक परीक्षाओं में 250 से अधिक उड़नदस्ते गठित करता है। इस बार इनकी संख्या 251 है। प्रत्येक उड़नदस्ते पर बोर्ड प्रशासन को लगभग 15 से 20 हजार रुपये तक खर्च उठाना पड़ता है। परीक्षाओं की पवित्रता बचाने के नाम पर बोर्ड प्रशासन को हर बार लगभग 40 से 50 लाख रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं।
इस बारे में शिक्षा बोर्ड के सचिव डी के बेहरा ने कहा कि पुराने नियम के चलते कमजोर छात्र मेरिट के छात्रों के बराबर आ खड़े होते थे। इस कारण अब बोर्ड कमजोर छात्रों को मोडरेशन का लाभ तो देगा पर इससे मेरिट के छात्रों के मुकाबले में खड़े होने का मौका नहीं देगा। इसीलिए मोडरेशन पालिसी में बदलाव कर दिया गया है।

थ्योरी और प्रैक्टीकल में किसी एक में फेल हुए तो नहीं देनी होंगी दो परीक्षाएं

सूत्र बताते है कि हरियाणा विद्यालय शिक्षा बोर्ड ने फैसला किया है कि प्रैक्टीकल व थ्योरी दोनों में से एक में फेल होने पर अब फेल परीक्षा को ही पास करना होगा। पै्रक्टीकल वाले विषयों के छात्रों को इससे बड़ी राहत मिलेगी। क्योंकि पुराने नियम के अनुसार प्रैक्टीकल या थ्योरी किसी भी एक में फेल होने पर छात्र को दोनों ही परीक्षाएं दोबारा देनी पड़ती थी। शिक्षा बोर्ड प्रशासन ने इस संबंध में बोर्ड निदेशक मंडल की बैठक में यह मुद्दा रखा था। निदेशक मंडल ने नए फैसले पर मुहर लगा दी है। इसके तहत अब दसवीं तथा बारहवीं कक्षा के प्रैक्टीकल विषयों में छात्रों को अब केवल फेल परीक्षा ही पास करना होगा। प्रदेश के हजारों छात्रों को इस नए फैसले का फायदा होगा। क्योंकि प्रैक्टीकल वाले विषय में थ्योरी व प्रैक्टीकल की अलग-अलग परीक्षा देनी पड़ती है और उनमें से किसी एक में भी फेल होने पर दोबारा नए सिरे से उन्हे दोनों परीक्षाओं की तैयारी करनी पड़ती थी। इस बारे में शिक्षा बोर्ड के उच्चाधिकारी ने पुष्टि की है।