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Friday, February 21, 2014

मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से शिक्षकों की बातचीत फेल

गेस्ट टीचर्स की प्रदेश सरकार के साथ वार्ता सिरे नहीं चढ़ पाई है। नई दिल्ली में 13दिन से आमरण अनशन कर रहे गेस्ट टीचर्स को सरकार ने वीरवार को वार्ता के लिए बुलाया था। अनशनकारियों ने बीते बुधवार को ही स्पष्ट कर दिया था कि बैठक में मुख्यमंत्री व शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अलावा और कोई मध्यस्थ नहीं होना चाहिए लेकिन सरकार ने गेस्ट टीचर्स के दूसरे गुट के नेता अरुण मलिक को भी समझौता वार्ता में शामिल कर लिया। 1हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ पहले ही अरुण मलिक को कार्यकारिणी से बर्खास्त कर चुका है। इस पर गेस्ट टीचर्स के दोनों गुट मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा के सामने ही आपस में उलझ पड़े, जिससे बात बिगड़ गई और अनशनकारियों का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल वार्ता बीच में ही छोड़कर चला गया। गेस्ट टीचर्स व मुख्यमंत्री के बीच शाम साढ़े चार बजे शुरू होने वाली बैठक रात साढ़े सात बजे शुरू हुई। मुख्यमंत्री भूपेंद्र हुड्डा ने गेस्ट टीचर्स के साथियों से पूछा कि वे क्या चाहते हैं, इस पर उन्होंने कहा कि उनकी एक ही मांग सभी को नियमित करने की है। इससे पहले की मुख्यमंत्री कुछ बोलते, अरुण मलिक ने अनशन कर रहे गेस्ट टीचर्स पर तंज कसना शुरू कर दिया। इससे अनशनकारियों के सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल पुष्प लता, कृष्ण कुमार, शशि भूषण, नरेंद्र श्योराण, सुनीता, शिवचरण व जनरैल सिंह भड़क गए। उन्होंने मुख्यमंत्री हुड्डा को साफ कर दिया कि अरुण मलिक के रहते वे किसी भी मुद्दे पर बात नहीं कर सकते। नियमित हुए बिना वे अनशन खत्म नहीं करेंगे। सरकार नियमितीकरण के आदेश जारी करे, अनशन समाप्त कर दिया जाएगा। इतना कहकर उन्होंने वार्ता से वाक आउट कर दिया। हरियाणा अतिथि अध्यापक संघ के संयोजक राजेंद्र शास्त्री ने कहा कि सरकार उनकी मांग को पूरा नहीं करना चाहती है। गेस्ट टीचर्स का प्रतिनिधित्व कर रहे शशि भूषण ने बताया कि वार्ता सिरे ने चढ़ने के लिए अरुण मलिक के साथ सरकार की जिम्मेदार है।