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Saturday, March 8, 2014

पात्रता परीक्षा में 90% अध्यापकों के अंगूठे के निशान फर्जी

शिक्षा विभाग ने सौंपी जांच रिपोर्ट 8285 में से 1093 निकले सही चंडीगढ़ : अध्यापक पात्रता परीक्षा पास करने में प्रदेश के 90 फीसद जेबीटी टीचरों ने बड़े-बड़े मुन्ना भाइयों को भी पीछे छोड़ दिया है। फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) मधुबन की जांच रिपोर्ट में सामने आया है कि वर्ष 2011 में नियुक्ति पाने वाले जेबीटी टीचरों में सिर्फ 1093 ऐसे हैं, जिन्होंने पात्रता परीक्षा सही तरीके से पास की है। शुक्रवार को हाई कोर्ट में मौलिक शिक्षा विभाग के महानिदेशक डी सुरेश कुमार ने हलफनामा देकर बताया कि उच्च न्यायालय के आदेश पर शिक्षा विभाग ने 2011 में जेबीटी टीचर नियुक्त हुए 8285 टीचरों द्वारा फर्जी तरीके से अध्यापक पात्रता परीक्षा पास करने की जांच शुरू की थी। विभाग ने सभी टीचरों के आवेदन फार्म व उत्तरपुस्तिका (ओएमआर सीट) पर अंगूठे के निशान की जांच की व इसकी एफएसएल जांच करवाई। एफएसएल जांच में जो रिपोर्ट आई वह चौंकाने वाली है। जांच में केवल 1093 टीचर ऐसे मिले जिनके अध्यापक पात्रता परीक्षा के आवेदन फार्म व उत्तर पुस्तिका पर अंगूठे के निशान एक जैसे मिले। बाकी 6800 टीचरों के अंगूठे के निशान नहीं मिल रहे हैं। इससे इन टीचरों का अध्यापक पात्रता परीक्षा पास करना संदेह के दायरे में है। हलफनामे के अनुसार एफएसएल जांच में पाया गया कि केवल 1093 शिक्षकों ने सही तरीके से परीक्षा पास की है, जबकि 751 टीचरों ने फर्जी तरीके से परीक्षा पास की है। रिपोर्ट के अनुसार 6049 टीचर परीक्षा पास करने में संदिग्ध पाए गए हैं। 390 टीचर ऐसे हैं जिन्होंने या तो नौकरी छोड़ दी है या भय की वजह से अपने अंगूठे की जांच नहीं करवाई या अन्य कारणों से वे जांच में नहीं आ पाए। 2 टीचर ऐसे हैं जिनका रिकार्ड नहीं मिल पाया। भर्ती में बड़े स्तर पर हुई धांधली : कोर्ट हाई कोर्ट के जस्टिस एजी मसीह ने इस जांच रिपोर्ट को रिकार्ड पर रखते हुए सरकार को निर्देश दिया कि संदिग्ध 6049 की पूर्ण जांच कर अगली सुनवाई तक कोर्ट में पेश की जाए। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील जसबीर मोर ने कोर्ट को कहा कि जांच में साफ हो गया है कि इस भर्ती में बड़े स्तर पर धांधली हुई है, लिहाजा इनकी भर्ती रद कर याचिकाकर्ता व प्रतीक्षा सूची में रहे उम्मीदवारों को नियुक्ति दी जाए। मोर ने कोर्ट को बताया कि इस मामले में सरकार की तरफ से शुरू में कहा गया था कि दोषी टीचर्स के प्रमाण पत्र रद कर उनके खिलाफ पुलिस जांच कराई जाएगी। निशान का मिलान था जरूरी याचिकाकर्ता ने 2011 में चयनित 8285 जेबीटी अध्यापकों की नियुक्ति को रद करने की मांग की है। परीक्षा के लिए जारी विवरणिका में साफ लिखा था कि परीक्षा की उत्तरपुस्तिका पर अंगूठे के निशान व फार्म पर किए अंगूठे के निशान का मिलान कर ही प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे ताकि परीक्षा में धोखाधड़ी न हो। आरोप है कि बोर्ड ने अंगूठे के निशान मिलाए बगैर ही पात्रता परीक्षा के प्रमाणपत्र वितरित कर दिए।