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Wednesday, May 28, 2014

किरकिरी के बाद शिक्षा विभाग ने रद्द की 30 को होने वाली टीएनए परीक्षा

ट्रेनिंग नीड असेस्मेंट (टीएनए) परीक्षा के मामले में शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल की नाराजगी के बाद शिक्षा विभाग के अफसर बैकफुट पर आ गए हैं।विभाग ने 30 मई को होने वाली टीएनए परीक्षा रद्द कर दी है। इसमें करीब 16,000 शिक्षकों को यह परीक्षा देनी थी। शिक्षा विभाग के प्रवक्ता ने बताया कि परीक्षा की अगली तिथि के बारे में फिलहाल कोई फैसला नहीं किया गया है। इससे पहले शिक्षा विभाग के अफसरों ने 26 मई को पीआरटी शिक्षकों के लिए टीएनए परीक्षा आयोजित की थी। विभाग ने शिक्षकों से अपील भी की थी कि इस टेस्ट का उनकी सेवाओं पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा। न ही किसी को फेल या पास किया जाएगा और न ही इसके आधार पर किसी की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) में मूल्यांकन किया जाएगा। इसके बावजूद शिक्षकों ने इस परीक्षा का बहिष्कार किया था। सोमवार को पानीपत के एक स्कूल में परीक्षा देने पहुंचा था एक ही अध्यापक। (फाइल फोटो) मंत्री और शिक्षकों को विश्वास में लिए बिना टीएनए परीक्षा आयोजित करने में सरकार की काफी किरकिरी हुई। सोमवार को इस परीक्षा का अधिकांश शिक्षकों ने बायकाट किया। इन शिक्षकों का आरोप है कि शिक्षा विभाग की एक अधिकारी ने अपने चहेते एनजीओ को आर्थिक लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से यह परीक्षा आयोजित की। सरकार यदि अध्यापकों को रिफ्रेशर कोर्स या ओरिएंटेशन ही करवाना चाहती है तो एससीईआरटी, एनसीईआरटी या एससीईआरटी के माध्यम से करवा सकती है। टीएनए परीक्षा आयोजन को लेकर शिक्षा विभाग के अफसरों ने अपनी ही मंत्री गीता भुक्कल को भी अंधेरे में रखा। भुक्कल ने मीडिया से बातचीत में साफ कहा था कि इस टेस्ट के बारे में उनसे न तो पूछा गया और न ही किसी तरह की मंजूरी ली गई थी। उन्हें तो अखबारों से ही पता चला था कि विभाग की ओर से इस तरह का कोई टेस्ट भी लिया जा रहा है। बहुत कम शिक्षक पहुंचे थे परीक्षा देने अफसरों ने मंत्री को रखा था अंधेरे में तंवर जता चुके नाराजगी: अपने विभाग के अफसरों की कार्यप्रणाली पर गीता भुक्कल ने नाराजगी जताई। उनसे पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर ने भी कहा था कि प्रदेश के कई अफसर बेलगाम हैं। अफसरों पर नियंत्रण न होने की वजह से सरकार की छवि पर असर पड़ रहा है।