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Wednesday, June 11, 2014

सावधान, एसी से फूल सकती हैं सांसें

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़ : अगर आप लगातार एयर कंडीशन में बैठने के आदी हैं तो सावधान हो जाइए। लगातार एसी के प्रयोग से आ सकते हैं अस्थमा की चपेट में। यह खुलासा पीजीआइ के एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर के डॉक्टरों की शोध में हुआ है। परिवार में अगर किसी को दमे का रोग है और उस परिवार का बच्चा ज्यादा खिलखिलाकर हंसता है तो उसे ऐसा भी ऐसा करने से रोकना चाहिए। ज्यादा हंसने से भी दमे का हमला हो सकता है। एपीसी के डॉक्टरों के अनुसार तेज हंसने से जेनेटिक तौर पर पहले ही कमजोर बच्चे के फेफड़ों की मांसपेशियां संकुचित हो जाती हैं। पीजीआइ के एडवांस पीडियेट्रिक सेंटर में 20 से 30 प्रतिशत बच्चे इसी तरह से दमे से पीड़ित होकर पहुंचते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक बच्चों में विटामीन डी की भी कमी पाई जा रही है। विटामीन डी का बड़ा स्त्रोत सूरज की रोशनी से प्राप्त गर्मी है। शरीर को गर्मी न मिलन से हड्डियां कमजोर हो रही हैं। शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी घट रही है। ऐसे में अस्थमा का अटैक हो सकता है।
बॉक्स कई तरह की एलर्जी से होता है अस्थमा:
डॉ. मीनू सिंह और डॉ. अमित अग्रवाल के अनुसार अस्थमा कई तरह की एलर्जी से भी होता है। यह एलर्जी खाद्य पदार्थो जैसे गेहूं, चावल, केले, आम इत्यादि से भी हो सकती है। फसल कटने के सीजन में और मौसम के बदलाव के दौरान भी अस्थमा के केस अचानक बढ़ जाते हैं। फेफड़ों में मौजूद ब्रोंकाई में एलर्जी से संकुचन हो जाता है। हर मंगलवार को पीजीआइ में लगने वाले अस्थमा क्लीनिक में आम तौर पर अस्थमा से पीड़ित लगभग 100 मरीज आते हैं लेकिन मौसम में बदलाव के दौरान इनकी तादाद दोगुनी से ज्यादा हो जाती है। डॉ. मीनू के अनुसार इसे पूरी तरह समाप्त तो नहीं किया जा सकता, लेकिन इस पर एक स्तर तक नकेल जरूर कसी जा सकती है।
जिंस भी है जिम्मेदार डॉ. अमित अग्रवाल व प्रो. मीनू सिंह के अनुसार टीएच-17 और टी रेगुलेटरी सेलों के असंतुलन से भी बच्चों में अस्थमा का अटैक होता है। अगर टीएच-17 की मात्रा बढ़ जाती है तो टी रेगुलेटरी सेल बैलेंस बनाते हैं। इसकी वजह जेनेटिक व एनवायरमेंटल फैक्टर भी हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल यह मालूम नहीं है कि शरीर में इन सेलों की कितनी मात्रा होती है।