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Wednesday, June 25, 2014

Himachal - कोर्ट ने पलटा फैसला: कहा 359 टीजीटी के पदों पर पुराने नियम करें लागू

शिमला।हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह टीजीटी (मेडिकल और नॉन मेडिकल) के 359 पदों को 22 अक्टूबर, 2009 से पहले बने आरएंडपी नियमों के तहत भरे। कोर्ट ने कहा कि ये पद जुलाई 2009 से अक्टूबर 2009 के अंतराल में खाली हुए थे। इन्हें समय पर न भरने के कारण इन पदों को भरने के लिए नए नियम थोपना कानून गलत होगा। कोर्ट ने आदेश दिए कि सरकार इन पदों को भरने के लिए हिमाचल प्रदेश एजुकेशन डिपार्टमेंट सर्विस रुल्स-1973 के तहत निहित शर्तों की अनुपालना करें। 22 अक्टूबर, 2009 और इसके बाद इन नियमों में हुए संशोधनों को इन पदों के संबंध में लागू न किया जाए। कोर्ट के इस फैसले से कुछ शिक्षकों को झटका लग सकता है। जो नए नियमों के तहत इन पुराने पदों पर पदोन्नत कर दिए गए थे। साइंस के पदों में भर्ती प्रार्थी शिक्षकों के अनुसार जुलाई 2009 से अक्टूबर 2009 तक टीजीटी (मेडिकल और नॉन मेडिकल)के 359 पद खाली हुए। इन पदों को उस दौरान नहीं भरा गया और बाद में भर्ती एवं पदोन्नति नियमों में संशोधन कर दिया। 2009 में आरएंडपी नियम बदले 22 अक्टूबर, 2009 को सरकार ने नियमों में संशोधन कर बतौर जेबीटी अध्यापक 2 वर्ष के नियमित कार्यकाल को बढ़ाकर 5 वर्ष कर दिया था ताकि उन्हें इन पदों पर भरने के लिए कंसीडर किया जाए। 16 जुलाई 2011 को फिर से इन नियमों में संशोधन कर टीजीटी शिक्षकों की भर्ती के लिए ग्रेजुएशन में 50 फीसदी अंकों की शर्त को जोड़ दिया। कई शिक्षक प्रमोशन से हो गए थे महरुम नए आरएंडपी नियमों में परिर्वतन के कारण कई टीजीटी साइंस के शिक्षक पदोन्नतियों के लिए अयोग्य हो गए। अब मिलेगी प्रमोशन:हाईकोर्ट के आदेशों के बाद अब शिक्षक पदोन्नति का लाभ ले पाएंगे। नए नियमों से भर्ती करना तर्कसंगत नहीं। हाईकोर्ट ने अपने आदेशों में कहा कि इन पदों को भरने के लिए पुरानी रिक्तियां पुराने नियम वाले सिद्धांत का अनुपालन होना चाहिए था क्योंकि सरकार ने न तो कभी यह निर्णय लिया कि ये पद कभी भी भरे नहीं जाएंगे और न ही कोई सकारात्मक निर्णय लिया कि इन पदों को भरने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे। प्रार्थियों की याचिकाओं को स्वीकार करते हुए 359 पदों पर भर्तियां पुराने नियमों के तहत किए जाने के आदेश पारित किए गए हैं। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान ने उन जेबीटी शिक्षकों को राहत दी है जो नए नियमों के तहत पदोन्नति के लिए पात्र नहीं रह गए थे।